दिल्ली में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के नियम हुए और सख्त, GPA के जरिए होने वाले फर्जीवाड़े पर सरकार का बड़ा एक्शन, अब हर संदिग्ध दस्तावेज की होगी गहन जांच

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नई व्यवस्था से प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन में बढ़ेगी पारदर्शिता

दिल्ली सरकार ने संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। सरकार का उद्देश्य स्टांप ड्यूटी की चोरी, फर्जी संपत्ति सौदों और अवैध लेनदेन पर रोक लगाना है। नए निर्देशों के तहत अब गैर-रक्त संबंधियों के नाम पर तैयार किए गए GPA दस्तावेजों का सीधे पंजीकरण नहीं होगा, बल्कि पहले उनकी विस्तृत जांच की जाएगी।

गैर-रक्त संबंधियों की GPA पर होगी विशेष जांच

सरकार के नए निर्देशों के अनुसार माता-पिता, पति-पत्नी, भाई-बहन, पुत्र और पुत्री जैसे करीबी रिश्तेदारों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर बनाई गई GPA को सीधे सब-रजिस्ट्रार के स्तर पर मंजूरी नहीं मिलेगी। ऐसे सभी मामलों को कलेक्टर ऑफ स्टांप के पास भेजा जाएगा, जहां यह जांच होगी कि दस्तावेज वास्तव में केवल पावर ऑफ अटॉर्नी है या उसके जरिए संपत्ति के स्वामित्व अथवा बिक्री से जुड़े अधिकार भी दिए जा रहे हैं। सामान्य परिस्थितियों में जांच प्रक्रिया 30 दिनों के भीतर पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि विशेष मामलों में यह अवधि अधिकतम तीन महीने तक हो सकती है।

स्टांप ड्यूटी चोरी और अवैध प्रॉपर्टी कारोबार पर लगेगी रोक

दिल्ली सरकार का कहना है कि कई मामलों में GPA का इस्तेमाल संपत्ति की खरीद-बिक्री और कब्जा हस्तांतरण के लिए किया जा रहा था, जबकि उस पर नियमानुसार स्टांप ड्यूटी का भुगतान नहीं किया जाता था। इससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ अवैध प्रॉपर्टी कारोबार को भी बढ़ावा मिलता था। नई व्यवस्था के जरिए ऐसे मामलों की पहचान कर आवश्यक स्टांप ड्यूटी वसूली जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।

हर दस्तावेज की होगी गहन पड़ताल, अधिकारियों की भी तय होगी जिम्मेदारी

नई गाइडलाइन के तहत यह देखा जाएगा कि GPA किसी आर्थिक लेनदेन के बदले बनाई गई है या नहीं, क्या उसके साथ संपत्ति का कब्जा भी सौंपा जा रहा है, क्या दस्तावेज अपरिवर्तनीय (Irrevocable) है और क्या उसके जरिए संपत्ति बेचने, गिरवी रखने या स्वामित्व हस्तांतरित करने का अधिकार दिया गया है। यदि ऐसा पाया जाता है तो दस्तावेज पर लागू स्टांप ड्यूटी तय की जाएगी। साथ ही यदि कोई अधिकारी नियमों की अनदेखी कर गलत तरीके से पंजीकरण करता है तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।

ऑनलाइन मॉनिटरिंग और मासिक समीक्षा पर रहेगा जोर

सरकार ने सभी सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों को ऐसे मामलों का अलग रिकॉर्ड रखने और हर महीने रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया जाएगा, ताकि प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन में पारदर्शिता बढ़े, सरकारी राजस्व सुरक्षित रहे और आम लोगों को अधिक भरोसेमंद एवं जवाबदेह व्यवस्था मिल सके।

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