Dharmendra Pradhan Resignation: 2 पन्नों के इस्तीफे में क्या लिखा? NEET विवाद, छात्रों के आंदोलन और नैतिक जिम्मेदारी पर कही बड़ी बातें

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

शिक्षा मंत्री पद छोड़ने का फैसला, प्रधानमंत्री को भेजा इस्तीफा

देशभर में NEET-UG परीक्षा को लेकर उठे विवाद और छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दो पन्नों का इस्तीफा पत्र सौंपते हुए कहा कि यह फैसला देश के छात्रों के हित, लोकतांत्रिक मूल्यों और वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। उन्होंने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी भी विद्यार्थी का भविष्य प्रभावित होने से बचाना और शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा बनाए रखना है।

इस्तीफे में शिक्षा व्यवस्था और युवाओं का किया जिक्र

अपने पत्र की शुरुआत में धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि वे कई वर्षों से शिक्षा और छात्र हितों से जुड़े रहे हैं। उनके अनुसार मजबूत शिक्षा प्रणाली किसी भी विकसित राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत होती है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं की आकांक्षाओं और सपनों का सम्मान करना हर जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है और उन्हें केंद्र सरकार में शिक्षा मंत्री के रूप में काम करने का अवसर मिलने पर गर्व है।

उन्होंने यह भी लिखा कि NEET-UG परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं के बाद सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपी। परीक्षा रद्द करने, दोबारा परीक्षा कराने और भविष्य में कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली लागू करने जैसे फैसले इसी दिशा में उठाए गए कदम थे।

‘मैंने जिम्मेदारी से कभी पीछे हटने की कोशिश नहीं की’

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में कहा कि पूरे घटनाक्रम के दौरान उन्होंने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार की और लगातार यह प्रयास किया कि लाखों छात्रों की परीक्षा निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो। उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य सरकारों, जिला प्रशासन तथा संबंधित एजेंसियों के सहयोग से दोबारा परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित कराई गई।

उन्होंने यह भी कहा कि उनका प्रयास हमेशा यही रहा कि किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य परीक्षा में हुई गड़बड़ियों की वजह से प्रभावित न हो। उनके मुताबिक सरकार ने परीक्षा प्रणाली को और पारदर्शी बनाने के लिए कई सुधारात्मक कदम भी उठाए।

छात्रों के आंदोलन और देश के माहौल को बताया फैसले की वजह

इस्तीफा पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि पिछले कुछ दिनों की घटनाओं ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से काफी दुख पहुंचाया। उनका कहना था कि देशभर में जिस तरह का माहौल बना, उसे देखते हुए उन्होंने महसूस किया कि अब नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ देना ही उचित होगा। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों का भविष्य किसी भी राजनीतिक विवाद या कानूनी उलझन में नहीं फंसना चाहिए और युवाओं का ध्यान अपनी पढ़ाई तथा करियर पर केंद्रित रहना चाहिए।

उन्होंने यह भी अपील की कि किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रामक जानकारी से बचना चाहिए ताकि देश की एकता और सामाजिक सौहार्द बना रहे।

प्रधानमंत्री और सहयोगियों का जताया आभार

अपने पत्र के अंत में धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में देश की सेवा करने का अवसर उनके सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय रहा। उन्होंने मंत्रिपरिषद के सहयोगियों, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रति भी धन्यवाद व्यक्त किया।

साथ ही उन्होंने कहा कि भले ही उन्होंने मंत्री पद छोड़ दिया हो, लेकिन राष्ट्र सेवा के प्रति उनका समर्पण पहले की तरह जारी रहेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में भी देश, युवाओं और अपने राज्य ओडिशा के विकास के लिए वे पूरी निष्ठा से कार्य करते रहेंगे।

Leave a Comment

और पढ़ें