स्कूल बंद होने के मुद्दे पर सरकार को घेरा
भोपाल में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मध्य प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में शिक्षा की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है और बड़ी संख्या में सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि इससे खासकर ग्रामीण, आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की पढ़ाई सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है।
यूडीआईएसई के आंकड़ों का हवाला देकर उठाए सवाल
उमंग सिंघार ने अपने बयान में यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (UDISE) के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले एक वर्ष के दौरान देशभर में बंद हुए स्कूलों में बड़ी हिस्सेदारी मध्य प्रदेश की है। उनके अनुसार, यदि इन आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में बंद हुए लगभग हर दो स्कूलों में से एक स्कूल मध्य प्रदेश का बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है और सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए।
शिक्षकों की कमी और बच्चों के भविष्य पर चिंता
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रदेश में स्कूलों के साथ-साथ शिक्षकों की कमी भी लगातार बढ़ रही है। उनका कहना है कि कई स्कूल पर्याप्त शिक्षकों के बिना संचालित हो रहे हैं, जबकि कुछ स्थानों पर स्कूलों के विलय या बंद होने से विद्यार्थियों को लंबी दूरी तय कर पढ़ाई के लिए जाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही तो लाखों बच्चों की शिक्षा प्रभावित होगी और इसका असर प्रदेश के भविष्य पर भी पड़ेगा।
सरकार की शिक्षा नीति पर उठाए सवाल
उमंग सिंघार ने कहा कि सरकार सार्वजनिक मंचों पर शिक्षा सुधार और विकसित भारत की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर सरकारी स्कूलों की संख्या घट रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूलों के बंद होने से सबसे अधिक नुकसान गरीब, ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को हो रहा है। उनका कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए सरकार को स्कूलों की संख्या बढ़ाने, शिक्षकों की नियुक्ति करने और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।










