नरवर किले से ऐतिहासिक तोप चोरी का रहस्य गहराया, क्या अष्टधातु में सोना होने की अफवाह बनी वारदात की वजह? पुलिस कई एंगल से कर रही जांच

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शिवपुरी (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित ऐतिहासिक नरवर किले से एक प्राचीन तोप चोरी होने का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। इस घटना ने पुरातत्व विभाग और पुलिस दोनों की चिंता बढ़ा दी है। शुरुआती जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि चोरों ने तोप को अष्टधातु से बनी समझकर निशाना बनाया। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से ऐसी अफवाहें फैली हुई थीं कि अष्टधातु से बनी प्राचीन वस्तुओं में सोना और अन्य कीमती धातुएं मौजूद होती हैं। इसी भ्रम के चलते चोरी की इस वारदात को अंजाम दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।

खजाने की अफवाह से जुड़ रहा है मामला

जांच अधिकारियों के अनुसार यह घटना कुछ महीने पहले किले के भीतर हुई एक दूसरी संदिग्ध गतिविधि से भी जुड़ी हो सकती है। उस दौरान अज्ञात लोगों ने कथित शाही खजाने की तलाश में किले के परिसर में करीब 20 फीट गहरी सुरंग खोद दी थी। पुलिस का मानना है कि दोनों घटनाओं के पीछे छिपे खजाने और प्राचीन धरोहरों से जुड़ी लोककथाओं का प्रभाव हो सकता है। फिलहाल इस एंगल से भी जांच की जा रही है कि कहीं दोनों वारदातों के पीछे एक ही गिरोह तो सक्रिय नहीं है।

पुलिस के सामने कई चुनौतियां

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऐतिहासिक और भारी भरकम तोप को चोरी करना सामान्य अपराधियों के बस की बात नहीं है। इसके लिए पहले से पूरी योजना, भारी सामान उठाने वाले उपकरण, परिवहन की व्यवस्था और किले के रास्तों की जानकारी होना जरूरी है। जांच टीम आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है और संभावित संदिग्धों की पहचान करने का प्रयास जारी है। हालांकि अब तक कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लग पाया है।

सीसीटीवी नहीं होने से जांच हुई मुश्किल

जांच में सबसे बड़ी बाधा यह सामने आई है कि नरवर किले के आसपास सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं। इसके अलावा किले से बाहर निकलने के कई रास्ते होने के कारण पुलिस के लिए चोरों की गतिविधियों का पता लगाना और उनके भागने के रूट की पहचान करना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। इसी वजह से जांच में तकनीकी और स्थानीय दोनों स्तर पर साक्ष्य जुटाने का काम जारी है।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना के बाद राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे महत्वपूर्ण स्मारकों पर आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी कैमरे और नियमित गश्त की व्यवस्था होना आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। फिलहाल पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है और जल्द ही आरोपियों तक पहुंचने का दावा कर रही है।

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