Kargil Vijay Diwas 2026: 84 दिन की जंग, 527 वीरों का बलिदान और पाकिस्तान की हार… जानिए कैसे भारतीय सेना ने कारगिल की हर चोटी पर फिर लहराया तिरंगा

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कारगिल विजय दिवस: शौर्य, बलिदान और जीत की अमर गाथा

हर वर्ष 26 जुलाई को पूरे देश में कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारतीय सेना के अदम्य साहस, रणनीतिक कौशल और देश की रक्षा के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान की याद दिलाता है। वर्ष 1999 में कारगिल की दुर्गम पहाड़ियों पर पाकिस्तान की ओर से की गई घुसपैठ के बाद शुरू हुए संघर्ष में भारतीय सेना ने लगभग 84 दिनों तक चले सैन्य अभियान के बाद दुश्मन को भारतीय सीमा से बाहर खदेड़ दिया था। इस वर्ष देश 27वां कारगिल विजय दिवस मना रहा है और शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है।

कैसे शुरू हुआ कारगिल संघर्ष

1999 की गर्मियों में भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को कारगिल, द्रास, बटालिक और मशकोह सेक्टर में संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली। जांच के दौरान पता चला कि पाकिस्तानी सैनिक और प्रशिक्षित घुसपैठिए नियंत्रण रेखा पार कर भारतीय क्षेत्र की कई ऊंची चोटियों पर कब्जा जमा चुके थे। इन रणनीतिक पहाड़ियों से श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर नजर रखी जा सकती थी, जिससे लद्दाख तक सेना की आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय सेना ने बड़े स्तर पर जवाबी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी।

ऑपरेशन विजय और ऑपरेशन सफेद सागर ने बदली जंग की तस्वीर

भारतीय सेना ने दुश्मन को पीछे हटाने के लिए ऑपरेशन विजय शुरू किया, जबकि भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सफेद सागर के माध्यम से हवाई सहायता प्रदान की। ऊंचे पहाड़, बेहद कम तापमान और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद भारतीय जवानों ने असाधारण साहस का परिचय दिया। टोलोलिंग, प्वाइंट 5140, प्वाइंट 4875 और टाइगर हिल जैसी रणनीतिक चोटियों पर दोबारा कब्जा भारतीय सेना की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा। इन सफलताओं ने युद्ध का रुख पूरी तरह भारत के पक्ष में मोड़ दिया।

84 दिनों की जंग की अहम घटनाएं

3 मई 1999 को कारगिल क्षेत्र में पहली बार संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली। 5 मई को गश्ती दल पर हमला हुआ, जिसमें पांच भारतीय सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए। इसके बाद 9 और 10 मई के बीच पाकिस्तानी गोलाबारी और बड़े पैमाने पर घुसपैठ की पुष्टि हुई। 15 मई से अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती शुरू हुई और 26 मई को भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सफेद सागर के तहत हवाई अभियान शुरू किया।

27 मई को अभियान के दौरान भारतीय वायुसेना के दो विमान दुर्घटनाग्रस्त हुए। फ्लाइट लेफ्टिनेंट के. नचिकेता को पाकिस्तान ने बंदी बना लिया, जबकि स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा ने देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। इसके बाद भारतीय सेना लगातार एक-एक चोटी पर कब्जा वापस लेती गई।

4 जुलाई 1999 को लगभग 11 घंटे तक चले कठिन अभियान के बाद टाइगर हिल पर फिर से तिरंगा लहराया गया, जिसे युद्ध का निर्णायक मोड़ माना जाता है। 7 जुलाई को बटालिक सेक्टर में भी महत्वपूर्ण सफलता मिली। इसी दौरान कैप्टन विक्रम बत्रा ने अद्भुत वीरता का प्रदर्शन करते हुए देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। 11 से 14 जुलाई के बीच भारतीय सेना ने अधिकांश कब्जाई गई चोटियों को मुक्त करा लिया और पाकिस्तान को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।

26 जुलाई बना इतिहास का स्वर्णिम दिन

करीब 84 दिनों तक चले संघर्ष के बाद 26 जुलाई 1999 को भारत ने ऑपरेशन विजय की सफलता की आधिकारिक घोषणा की। इस युद्ध में भारतीय सेना के 527 जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया, जबकि सैकड़ों सैनिक घायल हुए। भारतीय जवानों के अदम्य साहस और रणनीतिक कौशल ने दुनिया को यह संदेश दिया कि देश की एक-एक इंच जमीन की रक्षा के लिए भारत हर चुनौती का सामना करने में सक्षम है।

आज कारगिल विजय दिवस केवल एक सैन्य जीत का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह देशभक्ति, वीरता और राष्ट्र के प्रति समर्पण की मिसाल भी है। द्रास स्थित कारगिल वॉर मेमोरियल सहित देशभर में आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है और आने वाली पीढ़ियों को उनके बलिदान से प्रेरणा लेने का संदेश दिया जाता है।

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