बिहार के बाद असम सरकार का भी बड़ा फैसला, NEET प्रदर्शनकारियों पर दर्ज केस होंगे वापस, रिहाई की प्रक्रिया शुरू

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NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर हुए छात्र आंदोलन के बाद अब बिहार और असम सरकार ने प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत देने का फैसला लिया है। दोनों राज्यों ने आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने और हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने की प्रक्रिया शुरू करने का ऐलान किया है। सरकारों का कहना है कि तय समय तक दर्ज मामलों को समाप्त किया जाएगा और भविष्य में भी प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ कोई नई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

दोनों राज्यों ने वापस लिए मामलों का फैसला

बिहार सरकार ने घोषणा की है कि निर्धारित तिथि तक दर्ज सभी एफआईआर, परिवाद और कारण बताओ नोटिस वापस लिए जाएंगे। साथ ही आंदोलन में शामिल छात्रों और आयोजकों के खिलाफ आगे किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसी तरह असम सरकार ने भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और गिरफ्तार लोगों की रिहाई का फैसला किया है।

आंदोलन के दौरान सैकड़ों लोगों को लिया गया था हिरासत में

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, बिहार में छात्र आंदोलन के दौरान कुल 694 लोगों को हिरासत में लिया गया था। इनमें बड़ी संख्या में नाबालिग भी शामिल थे, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। वहीं हिंसा से जुड़े मामलों में कुछ लोगों को अदालत में पेश किया गया था। अब सरकार के फैसले के बाद इन मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू होगी।

प्रदर्शन के दौरान कई पुलिसकर्मी भी हुए थे घायल

पुलिस के अनुसार, आंदोलन के दौरान हुई हिंसक घटनाओं में कई पुलिस अधिकारी और जवान घायल हुए थे। कुछ जिलों में प्रशासनिक अधिकारियों को भी चोटें आई थीं। इन घटनाओं के बावजूद सरकार ने मौजूदा हालात को देखते हुए मामलों को समाप्त करने और सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

CJP ने पहले दी थी दोबारा आंदोलन की चेतावनी

इस फैसले से पहले CJP ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चेतावनी दी थी कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस नहीं लिए गए तो संगठन फिर से देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगा। संगठन का दावा था कि केंद्र सरकार के साथ हुई बातचीत में मामलों को वापस लेने और प्रदर्शनकारियों पर भविष्य में कार्रवाई नहीं करने को लेकर सहमति बनी थी।

कानूनी सहायता के लिए फंड की घोषणा

वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने आंदोलन से जुड़े छात्रों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए एक करोड़ रुपये देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि जिन छात्रों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं, उन्हें कानूनी मदद उपलब्ध कराई जाएगी ताकि वे अपनी लड़ाई प्रभावी ढंग से लड़ सकें।

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