तमिलनाडु सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट, धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम बने पिछड़े वर्ग के लोगों को आरक्षण देने की मांग तेज

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चेन्नई: तमिलनाडु की मुख्यमंत्री विजय थलपति के नेतृत्व वाली सरकार ने धर्म परिवर्तन कर इस्लाम अपनाने वाले पिछड़े वर्ग के लोगों को आरक्षण देने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। राज्य सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें वर्ष 2024 के सरकारी आदेश को असंवैधानिक करार देते हुए ऐसे लोगों को पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) श्रेणी के तहत आरक्षण देने से इनकार कर दिया गया था।

सरकार का पक्ष

सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) में तमिलनाडु सरकार का कहना है कि किसी व्यक्ति के धर्म परिवर्तन कर लेने मात्र से उसकी सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति तुरंत नहीं बदल जाती। सरकार का तर्क है कि यदि कोई व्यक्ति पहले से पिछड़े वर्ग, अत्यंत पिछड़े वर्ग, विमुक्त समुदाय या अनुसूचित जाति से संबंधित रहा है, तो केवल धर्म बदलने के आधार पर उसकी सामाजिक पिछड़ेपन की वास्तविकता समाप्त नहीं मानी जा सकती। इसी वजह से ऐसे लोगों को राज्य में मुस्लिम समुदाय के लिए निर्धारित 3.5 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए।

हाईकोर्ट ने क्यों रद्द किया था आदेश

यह मामला मार्च 2024 में जारी उस सरकारी आदेश से जुड़ा है, जिसमें धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम बने लोगों को मुस्लिम समुदाय की अधिसूचित पिछड़ी जातियों में शामिल होने पर आरक्षण का लाभ देने का प्रावधान किया गया था। हालांकि मद्रास हाईकोर्ट ने इस आदेश को संविधान के अनुरूप नहीं मानते हुए रद्द कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि धर्म परिवर्तन के बाद कोई व्यक्ति अपनी पूर्व जातिगत पहचान के आधार पर आरक्षण का दावा नहीं कर सकता।

अब सुप्रीम कोर्ट करेगा अंतिम फैसला

हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अब तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है। इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय का फैसला न केवल राज्य सरकार की नीति बल्कि धर्म परिवर्तन और आरक्षण से जुड़े कानूनी एवं संवैधानिक पहलुओं पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। फिलहाल सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं।

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