नई दिल्ली। नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अदालत में पेश किए गए अपने जवाब में कई अहम दावे किए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, मामले में गिरफ्तार आरोपियों के बीच कथित तौर पर प्रश्नपत्र हासिल करने के लिए 5 लाख रुपये का भुगतान किया गया था। सीबीआई का कहना है कि जांच के दौरान मिले डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ते हैं। फिलहाल मामले की सुनवाई अदालत में जारी है और अंतिम फैसला न्यायालय द्वारा ही लिया जाएगा।
जांच में सामने आए अहम दावे
सीबीआई के मुताबिक, जांच के दौरान एक आरोपी के मोबाइल फोन से केमिस्ट्री विषय से जुड़े हाथ से लिखे गए कई प्रश्नों की तस्वीरें बरामद हुई हैं। एजेंसी का दावा है कि इन तस्वीरों में कुल 132 प्रश्न दर्ज थे, जिनमें से 111 प्रश्न राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित वास्तविक NEET-UG परीक्षा के प्रश्नपत्र से मेल खाते पाए गए। जांच एजेंसी का यह भी कहना है कि बरामद नोट्स और तस्वीरें कथित रूप से आरोपी की हस्तलिपि में तैयार की गई थीं।
मेटाडेटा जांच और पैसों के लेन-देन का दावा
सीबीआई ने अदालत को बताया कि मोबाइल फोन की मेटाडेटा जांच से यह संकेत मिला है कि संबंधित तस्वीरें परीक्षा आयोजित होने से लगभग दस दिन पहले ली गई थीं। एजेंसी ने यह भी दावा किया कि कथित पेपर लीक के बदले 5 लाख रुपये का भुगतान किया गया था। जांच के अनुसार, यह राशि सह-आरोपियों के माध्यम से उपलब्ध कराई गई थी। हालांकि, इन सभी दावों की न्यायिक प्रक्रिया के दौरान जांच और परीक्षण अभी जारी है।
अब तक कई गिरफ्तारियां, जांच जारी
जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले में अब तक कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सीबीआई लगातार डिजिटल रिकॉर्ड, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके। एजेंसी का कहना है कि यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो आगे भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नोट: यह खबर सीबीआई द्वारा अदालत में प्रस्तुत किए गए दावों और जांच से जुड़े तथ्यों पर आधारित है। मामले में अंतिम निर्णय संबंधित न्यायालय द्वारा सुनाया जाएगा।










