भोपाल। मध्यप्रदेश में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए आने वाले समय में बड़ी राहत मिल सकती है। प्रदेश के कई निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों ने शुल्क विनियामक समिति (FRC) के पास वार्षिक ट्यूशन फीस में कमी का प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव में न्यूनतम वार्षिक शुल्क 35 हजार रुपये निर्धारित करने की मांग की गई है। यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढ़ाई पहले की तुलना में अधिक किफायती हो सकती है और इसका लाभ हजारों विद्यार्थियों को मिलेगा।
कम प्रवेश से जूझ रहे निजी इंजीनियरिंग कॉलेज
पिछले कुछ वर्षों से प्रदेश के अधिकांश निजी इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या लगातार घट रही है। कई कॉलेजों की आधे से अधिक सीटें खाली रह जाती हैं, जिससे संस्थानों पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है। कॉलेज संचालकों का कहना है कि छात्रों की कम संख्या के कारण संचालन लागत बढ़ रही है और संस्थानों के लिए व्यवस्थाओं को बनाए रखना चुनौती बनता जा रहा है।
फीस कम होने से बढ़ सकते हैं एडमिशन
निजी कॉलेजों का मानना है कि यदि वार्षिक फीस कम की जाती है तो प्रदेश के साथ-साथ दूसरे राज्यों के विद्यार्थी भी यहां प्रवेश लेने के लिए आकर्षित होंगे। साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम वर्गीय परिवारों के छात्रों के लिए भी इंजीनियरिंग की पढ़ाई आसान हो जाएगी। कॉलेजों का तर्क है कि कम शुल्क से सीटों पर अधिक प्रवेश होंगे, जिससे छात्रों और संस्थानों दोनों को लाभ मिलेगा।
बदलते दौर में इंजीनियरिंग शिक्षा के सामने नई चुनौतियां
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इंजीनियरिंग कॉलेजों में घटते प्रवेश का कारण केवल फीस नहीं है। उद्योगों की बदलती जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रमों का समय पर अपडेट न होना, नई तकनीकों पर पर्याप्त फोकस की कमी और रोजगार को लेकर छात्रों की बदलती प्राथमिकताएं भी इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। यही वजह है कि कई विद्यार्थी अब अन्य प्रोफेशनल और स्किल आधारित कोर्स की ओर रुख कर रहे हैं।
समिति करेगी प्रस्ताव पर अंतिम फैसला
शुल्क विनियामक समिति के अधिकारियों के अनुसार, निजी कॉलेजों से प्राप्त प्रस्तावों की समीक्षा की जा रही है। समिति संस्थानों के वित्तीय रिकॉर्ड, संचालन लागत और अन्य आवश्यक पहलुओं का मूल्यांकन करने के बाद ही न्यूनतम फीस पर अंतिम निर्णय लेगी। यदि प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो आने वाले शैक्षणिक सत्र से प्रदेश के निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में छात्रों को कम फीस पर पढ़ाई करने का अवसर मिल सकता है।










