नर्मदा में दूध अर्पण मामले पर NGT का अहम फैसला: धार्मिक आस्था पर रोक नहीं, लेकिन पर्यावरण संरक्षण पर दिए सख्त निर्देश

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भोपाल: नर्मदा नदी में धार्मिक अनुष्ठान के दौरान दूध अर्पित करने के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की भोपाल पीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में ऐसा कोई वैधानिक प्रावधान मौजूद नहीं है, जो धार्मिक परंपरा के तहत नदी में दूध अर्पित करने पर रोक लगाता हो। हालांकि, पीठ ने यह भी कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और भविष्य में ऐसे आयोजनों के दौरान विशेष निगरानी रखी जानी चाहिए, ताकि नदी की स्वच्छता और पारिस्थितिकी पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

11 हजार लीटर दूध अर्पित करने की घटना के बाद पहुंचा मामला NGT

यह मामला उस समय सामने आया था जब सीहोर जिले के सातदेव क्षेत्र में आयोजित एक धार्मिक अनुष्ठान की पूर्णाहुति के बाद टैंकरों के माध्यम से लगभग 11 हजार लीटर दूध नर्मदा नदी में अर्पित किया गया था। इस घटना को पर्यावरण के लिए हानिकारक बताते हुए एक याचिका NGT में दायर की गई। इसके बाद मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) की अगुवाई में एक जांच समिति गठित की गई, जिसने पूरे मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट न्यायाधिकरण को सौंपी।

जांच रिपोर्ट में क्या सामने आया?

जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि नर्मदा नदी के लगातार प्रवाह, पर्याप्त जल मात्रा और प्राकृतिक आत्मशुद्धिकरण क्षमता को देखते हुए उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्यों में इस घटना से नदी की जल गुणवत्ता पर किसी प्रत्यक्ष प्रतिकूल प्रभाव की पुष्टि नहीं हुई। हालांकि समिति ने यह भी माना कि दूध एक जैविक पदार्थ है और बड़ी मात्रा में किसी भी जल स्रोत में सीधे प्रवाहित करना पर्यावरणीय दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता। विशेष रूप से कम जल प्रवाह या स्थिर जल वाले क्षेत्रों में ऐसी गतिविधियां प्रदूषण का कारण बन सकती हैं।

NGT ने पर्यावरण और आस्था के बीच संतुलन पर दिया जोर

सुनवाई के दौरान न्यायाधिकरण ने कहा कि याचिकाकर्ता ऐसा कोई कानून प्रस्तुत नहीं कर सके, जिससे यह सिद्ध हो कि धार्मिक अनुष्ठानों में नदी में दूध अर्पित करना प्रतिबंधित है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वर्तमान दिशानिर्देश मुख्य रूप से धार्मिक आयोजनों के प्रबंधन और प्रशासनिक अनुमति से जुड़े हैं, न कि दूध अर्पित करने पर रोक लगाने से। साथ ही NGT ने यह भी कहा कि धार्मिक आस्था का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन इसके नाम पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों से बचना भी आवश्यक है।

भविष्य के आयोजनों पर रहेगी विशेष निगरानी

मामले का निस्तारण करते हुए NGT ने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया कि नर्मदा तट पर आयोजित होने वाले बड़े धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए। न्यायाधिकरण ने कहा कि यदि भविष्य में किसी आयोजन से नदी के पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका हो, तो संबंधित एजेंसियां समय रहते आवश्यक कदम उठाएं ताकि धार्मिक परंपराओं और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।

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