नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर NEET परीक्षा से जुड़े विवाद को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच लंबे समय से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है। कई दिनों तक चले इस आंदोलन के बाद केंद्र सरकार के साथ हुई बातचीत और लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने यह फैसला लिया। अनशन समाप्त करने के बाद जारी अपने संदेश में वांगचुक ने आंदोलन, छात्रों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर भी अपनी राय खुलकर रखी।
लिखित आश्वासन मिलने के बाद खत्म किया अनशन
सोनम वांगचुक ने बताया कि पिछले कई दिनों से केंद्र सरकार के साथ लगातार बातचीत चल रही थी। इस दौरान उनकी प्रमुख मांगों पर चर्चा हुई और सरकार की ओर से लिखित आश्वासन दिया गया। इसी के बाद उन्होंने अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने का फैसला लिया। उनका कहना था कि आंदोलन का उद्देश्य छात्रों की आवाज सरकार तक पहुंचाना था और जब बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ी तो अनशन जारी रखने का कोई औचित्य नहीं रह गया।
उन्होंने यह भी कहा कि देशभर के कई जनप्रतिनिधियों और सामाजिक हस्तियों ने उनसे स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए अनशन समाप्त करने की अपील की थी। साथ ही आंदोलन के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या हिंसा की आशंका को देखते हुए भी उन्होंने यह निर्णय लिया।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर क्या बोले सोनम वांगचुक?
अनशन समाप्त करने के बाद सोनम वांगचुक ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि मंत्री स्वयं पद छोड़ देते तो इससे सरकार की छवि बेहतर होती और जनता के बीच एक सकारात्मक संदेश जाता। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मंत्री के इस्तीफा देने या न देने से छात्रों के भविष्य पर सीधा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन इस पूरे मुद्दे को गंभीरता से लेना सरकार के हित में है।
वांगचुक का कहना था कि छात्रों की चिंताओं को समय रहते समझना और उन पर उचित कदम उठाना किसी भी सरकार की जिम्मेदारी होती है। ऐसे मामलों में संवेदनशीलता दिखाना अधिक महत्वपूर्ण है।
आंदोलन को लेकर आगे की रणनीति पर नजर
अनशन समाप्त होने के बाद भी NEET विवाद और छात्रों की मांगों को लेकर चर्चाएं जारी हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार अपने लिखित आश्वासन पर किस तरह अमल करती है और छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं। वहीं आंदोलन से जुड़े पक्षों का कहना है कि यदि तय समय में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आगे की रणनीति पर भी विचार किया जा सकता है।










