नई दिल्ली: पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार के लिए लंबे समय से आवाज उठाने वाले सोनम वांगचुक ने संसद मार्च से पहले अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा है कि यदि उनकी प्रमुख मांगों पर सरकार और सांसद गंभीर पहल करते हैं तो वह अपना अनशन समाप्त करने पर विचार कर सकते हैं। सफदरजंग अस्पताल से लिखे गए एक पत्र में उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की जरूरत पर जोर देते हुए सांसदों से मानसून सत्र के दौरान इस मुद्दे को संसद में उठाने की अपील की है।
वांगचुक का कहना है कि देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली से जुड़े विवाद छात्रों के भविष्य पर गंभीर असर डाल रहे हैं। उनका मानना है कि इन घटनाओं पर केवल जांच या बयानबाजी पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी तय करने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस दिशा में स्पष्ट प्रतिबद्धता दिखाती है तो वह अपना अनशन समाप्त करने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने अपने पत्र में यह भी कहा है कि यदि उन्हें संसद भवन के प्रवेश द्वार तक जाने की अनुमति मिलती है तो विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद वहां पहुंचकर यह भरोसा दें कि वे मानसून सत्र में शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली में सुधार का मुद्दा मजबूती से उठाएंगे। वांगचुक का मानना है कि संसद देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है और छात्रों से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर व्यापक चर्चा होना आवश्यक है।
सोनम वांगचुक ने एक वैकल्पिक प्रस्ताव भी रखा है। उन्होंने कहा कि यदि स्वास्थ्य कारणों की वजह से वह संसद भवन तक नहीं पहुंच पाते हैं, तो अलग-अलग दलों के सांसद सफदरजंग अस्पताल आकर उनसे मुलाकात करें और शिक्षा में जवाबदेही तथा पेपर लीक जैसे मामलों पर संसद में चर्चा कराने का सार्वजनिक आश्वासन दें। उनका कहना है कि इससे छात्रों और युवाओं के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा कि उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुना जा रहा है।
इस बीच वांगचुक ने अस्पताल में अपने ऊपर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों का भी जिक्र किया है। उनका दावा है कि अस्पताल में रहते हुए उनकी गतिविधियों और लोगों से संवाद पर सीमाएं लगाई गई हैं, जिससे वह अपनी बात खुलकर नहीं रख पा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और इसका उद्देश्य केवल शिक्षा व्यवस्था में सुधार तथा छात्रों के हितों की रक्षा करना है।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार और विभिन्न राजनीतिक दल वांगचुक की अपील पर क्या रुख अपनाते हैं। यदि उनकी शर्तों पर सकारात्मक पहल होती है तो लंबे समय से जारी उनका अनशन समाप्त हो सकता है। वहीं, संसद के मानसून सत्र में शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन सकता है।










