दिल्ली में संसद मार्च से पहले लागू हुई BNSS की धारा 163, जानिए क्या है नया प्रावधान और धारा 144 से कैसे है अलग

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संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। प्रस्तावित संसद मार्च और विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी गई है। इस फैसले के बाद लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर धारा 163 क्या है, इसे कब लागू किया जाता है और यह पहले से प्रचलित दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 144 से किस तरह अलग है। दरअसल, नए आपराधिक कानून लागू होने के बाद धारा 144 की जगह अब BNSS की धारा 163 ने ले ली है, हालांकि इसका उद्देश्य सार्वजनिक शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखना ही है।

धारा 163 BNSS का उद्देश्य क्या है?

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत लागू धारा 163 जिला मजिस्ट्रेट या कार्यपालक मजिस्ट्रेट को विशेष परिस्थितियों में निषेधाज्ञा जारी करने का अधिकार देती है। यदि किसी क्षेत्र में हिंसा, दंगा, सार्वजनिक अशांति, कानून-व्यवस्था बिगड़ने या सुरक्षा संबंधी खतरे की आशंका हो, तो प्रशासन इस धारा के तहत लोगों के एकत्र होने, जुलूस निकालने या ऐसी गतिविधियों पर अस्थायी रोक लगा सकता है, जिनसे स्थिति और गंभीर हो सकती है। इसका उद्देश्य किसी भी अप्रिय घटना को पहले ही रोकना और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

नई दिल्ली में क्यों लागू की गई यह धारा?

20 जुलाई से शुरू हुए संसद के मानसून सत्र के दौरान राजधानी में विभिन्न संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन और संसद मार्च का आह्वान किया गया है। प्रशासन का मानना है कि बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने से यातायात प्रभावित हो सकता है और सुरक्षा व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए नई दिल्ली जिले के संवेदनशील इलाकों में धारा 163 लागू की गई है। इसके तहत बिना अनुमति भीड़ जुटाने, जुलूस निकालने और कुछ वस्तुओं के साथ प्रदर्शन करने पर रोक लगाई गई है, जबकि निर्धारित स्थानों पर प्रशासन की अनुमति मिलने पर सीमित प्रदर्शन की छूट दी जा सकती है।

धारा 144 और धारा 163 में क्या अंतर है?

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, धारा 163 कोई पूरी तरह नया प्रावधान नहीं है, बल्कि यह पहले लागू रही CrPC की धारा 144 का संशोधित और नए कानून के अनुरूप बदला गया स्वरूप है। दोनों का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक शांति बनाए रखना और संभावित हिंसा या अव्यवस्था को रोकना है। अंतर केवल इतना है कि नए आपराधिक कानून लागू होने के बाद इसका नाम और कानूनी ढांचा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के अंतर्गत शामिल कर दिया गया है। ऐसे में पहले जिस स्थिति में धारा 144 लागू होती थी, अब उसी तरह की परिस्थितियों में धारा 163 लागू की जाती है।

नियमों का उल्लंघन करने पर क्या हो सकता है?

प्रशासन द्वारा जारी निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। यदि कोई व्यक्ति प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना अनुमति भीड़ इकट्ठा करता है, जुलूस निकालता है या आदेशों की अनदेखी करता है, तो पुलिस उसे हिरासत में लेकर कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई कर सकती है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे जारी निर्देशों का पालन करें और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।

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