भोपाल: मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मामला अब न्यायालय तक पहुंच गया है। राज्य के करीब 1,900 सरकारी स्कूलों में शिक्षक नहीं होने के आरोपों पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह मामला नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के आधार पर दायर एक जनहित याचिका के बाद सामने आया है। अदालत ने सरकार सहित संबंधित पक्षों से निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा है।
CAG रिपोर्ट में सामने आई चौंकाने वाली स्थिति
याचिका में CAG की ऑडिट रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि वर्ष 2018 से 2023 के बीच राज्य के हजारों सरकारी स्कूलों की समीक्षा में बड़ी संख्या में ऐसे स्कूल मिले, जहां नियमित शिक्षक मौजूद नहीं थे। रिपोर्ट के अनुसार, कई स्कूलों में छात्र नामांकित होने के बावजूद शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई थी। वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे विद्यालय भी पाए गए, जहां छात्र नहीं थे लेकिन शिक्षक पदस्थ थे। इस असंतुलित व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं।
शिक्षकों की तैनाती पर उठे सवाल
याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रदेश में शिक्षकों की पोस्टिंग व्यवस्थित तरीके से नहीं की गई। कई स्थानों पर आवश्यकता वाले स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं, जबकि कुछ विद्यालयों में जरूरत से अधिक स्टाफ मौजूद है। इसके अलावा कुछ शिक्षकों को ऐसे स्कूलों में तैनात किए जाने का भी उल्लेख किया गया है, जहां स्वीकृत पद ही उपलब्ध नहीं थे। इस पूरी व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी अदालत से की गई है।
शिक्षा की गुणवत्ता पर भी चिंता
याचिका में यह भी कहा गया है कि शिक्षकों की कमी का सीधा असर विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन पर पड़ा है। माध्यमिक स्तर की परीक्षाओं में परिणामों में गिरावट और कई जिलों में स्कूलों के नियमित निरीक्षण नहीं होने जैसी बातें भी याचिका का हिस्सा हैं। साथ ही यह आरोप भी लगाया गया है कि कुछ शिक्षा अधिकारियों को अन्य विभागों में कार्यरत रखने के बावजूद उनका वेतन शिक्षा विभाग से जारी किया जाता रहा।
हाई कोर्ट ने मांगा जवाब
मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अदालत में यह भी मांग रखी गई है कि जिन स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं, वहां तय समयसीमा के भीतर नियुक्तियां की जाएं और शिक्षकों की तैनाती की पूरी प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। अब इस मामले में सरकार के जवाब और अदालत के अगले आदेश पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।










